2010 में एक व्यक्ति CAG प्रमुख विनोद राय एक लाख छिहत्तर हज़ार करोड़ के 2G घोटाले की रिपोर्ट देते हैं। फिर एक दूसरा व्यक्ति अन्ना हजारे तीसरे व्यक्ति के साथ मिलकर कर आतें हैं और इस घोटाले को जनता को समझाने के लिए 05-04-2011 को आंदोलन शुरू कर देतें हैं पुरे देश का युवा उनके साथ जुड़ जाता है। साथ में एक चौथी औरत और पाँचवा व्यक्ति भी इस आंदोलन से जुड़ जाता हैं। फिर एक छठा व्यक्ति आकर 2G घोटाले के साथ काले धन के बारे में बताने के लिए एक और नया आंदोलन 09-08-2012 को शुरू कर देता है। सातवां व्यक्ति इसे सुप्रीम कोर्ट लेकर जाता है। और आठवां व्यक्ति इन सब सातों व्यक्तियों की मेहनत को कंपाइल करके जनता से इस घोटाले के ख़िलाफ़ वोट माँगाता है औ कामयाबी भी हासिल कर लेता है। लेकिन सात साल बाद पता चलता है की घोटाला हुआ ही नहीं सभी आरोपी बरी हो गए। अब पहला व्यक्ति "विनोद राय" पद्म भूषण पाकर BCCI का बॉस बना हुआ है। दूसरे व्यक्ति के आगे पीछे कोई नहीं का हवाला देते हुए अपने घर बेठ जाता है। तीसरा व्यक्ति दिल्ली का CM है। चौथी औरत "किरण बेदी" उप राज्यपाल है। पाँचवां आदमी "जनरल वी के सिंह" राज्यस्तर के मंत्री हैं। छठा आदमी "बाबा रामदेव" अरबों का कामयाब बिज़नैसमैन बन जाता है। सातवां आदमी "सुब्रमण्यम स्वामी" सांसद बन गया और आठवां व्यक्ति प्रधानमंत्री बन गया और आप? सही मायनों में असली मज़ाक़ इसी को कहते हैं। मुस्कुराइए आप भारत में हैं।